ईरान - खुरासन की जंग
"खुरासान की जंग" या खुरासान का इतिहास संघर्षों की एक लंबी गाथा है। जब हम इतिहास में खुरासान की बात करते हैं, तो इसका अर्थ केवल आधुनिक ईरान का एक प्रांत नहीं, बल्कि 'ग्रेटर खुरासान' (Greater Khorasan) से होता है, जिसमें आज का उत्तर-पूर्वी ईरान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के कुछ हिस्से शामिल थे।
यहाँ खुरासान की जंगों और उससे जुड़े ऐतिहासिक व धार्मिक पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. खुरासान का भौगोलिक और रणनीतिक महत्व
'खुरासान' फारसी शब्द है जिसका अर्थ है "जहाँ से सूरज उगता है" (Land of the Rising Sun)। मध्यकाल में यह सिल्क रोड का मुख्य केंद्र था। जो भी शक्ति खुरासान पर नियंत्रण पाती थी, उसका मध्य एशिया और भारत के व्यापारिक मार्गों पर वर्चस्व हो जाता था। यही कारण है कि यह क्षेत्र सदियों तक युद्ध का अखाड़ा बना रहा।
2. खुरासान के प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध
खुरासान ने कई महान साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है। यहाँ के मुख्य संघर्ष निम्नलिखित हैं:
क. अरब-इस्लामी विजय (7वीं शताब्दी)
ससानिद साम्राज्य के पतन के बाद, खलीफा उमर और बाद में उस्मान (रजि.) के समय में मुस्लिम सेनाओं ने खुरासान की ओर रुख किया। यह क्षेत्र उनके लिए मध्य एशिया का प्रवेश द्वार था। 651 ईस्वी के आसपास खुरासान पूरी तरह से मुस्लिम नियंत्रण में आ गया।
ख. अब्बासी क्रांति (747–750 ईस्वी)
यह खुरासान के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था। उमय्यद खिलाफत के खिलाफ अबू मुस्लिम खुरासानी ने यहीं से काले झंडों के साथ विद्रोह शुरू किया था। खुरासानी योद्धाओं की मदद से ही उमय्यदों का तख्ता पलटा गया और अब्बासी खिलाफत की स्थापना हुई।
ग. मंगोल आक्रमण (1221 ईस्वी)
खुरासान के इतिहास का सबसे काला अध्याय चंगेज खान का आक्रमण था। मंगोलों ने मर्व, निशापुर और हेरात जैसे महान शहरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। कहा जाता है कि निशापुर में मंगोलों ने हर जीवित प्राणी (इंसान और जानवर) का कत्ल कर दिया था ताकि शहर फिर कभी सिर न उठा सके।
घ. तैमूर और सफ़विद काल
बाद में अमीर तैमूर ने इस क्षेत्र पर कब्जा किया। 16वीं शताब्दी में, ईरान के सफ़विद वंश और उज्बेकों के बीच खुरासान को लेकर दर्जनों युद्ध हुए।
3. खुरासान और धार्मिक मान्यताएँ (इस्लामी एस्केटोलॉजी)
वर्तमान समय में "खुरासान की जंग" की चर्चा अक्सर धार्मिक भविष्यवाणियों के संदर्भ में की जाती है। हदीसों (इस्लामी परंपराओं) में खुरासान का उल्लेख 'आखिरी समय' (End of Times) के संकेतों के रूप में मिलता है।
काले झंडों का जिक्र
कई हदीसों में उल्लेख है कि:
"खुरासान की ओर से काले झंडे निकलेंगे, जिन्हें कोई भी ताकत तब तक नहीं रोक पाएगी जब तक वे 'ईलिया' (यरूशलेम) में न गाड़ दिए जाएं।"
ऐतिहासिक और आधुनिक व्याख्या:
- अब्बासी काल: ऐतिहासिक रूप से, अब्बासियों ने इन हदीसों का उपयोग अपनी सत्ता को वैध बनाने के लिए किया था।
- आधुनिक युग: वर्तमान में कई चरमपंथी समूहों (जैसे अल-कायदा या ISIS-K) ने इन हदीसों का सहारा लेकर खुद को खुरासान का योद्धा बताने की कोशिश की, लेकिन विद्वान इसे गलत व्याख्या मानते हैं।
4. आधुनिक युग में खुरासान का संघर्ष (ISIS-K)
21वीं सदी में 'खुरासान' नाम फिर से चर्चा में आया जब ISIS-K (Islamic State – Khorasan Province) का उदय हुआ।
- उत्पत्ति: यह संगठन 2015 के आसपास पूर्वी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हुआ।
- तालिबान बनाम ISIS-K: वर्तमान में खुरासान की ज़मीन पर सबसे बड़ी जंग तालिबान और ISIS-K के बीच चल रही है। जहाँ तालिबान खुद को अफगानिस्तान तक सीमित रखता है, वहीं ISIS-K एक वैश्विक खिलाफत और 'खुरासान' की ऐतिहासिक सीमाओं को फिर से जीतने का दावा करता है।
- प्रभाव: इस जंग में हजारों आम नागरिक मारे जा चुके हैं और यह क्षेत्र आज भी अस्थिरता का केंद्र बना हुआ है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें