सिकंदर - Biography


 

सिकंदर महान (Alexander the Great) का इतिहास विश्व के सबसे प्रभावशाली और साहसी सेनापतियों में से एक का है। मात्र 33 वर्ष के जीवनकाल में उन्होंने एक ऐसा विशाल साम्राज्य खड़ा किया, जो यूनान से लेकर भारत की सीमाओं तक फैला हुआ था।

​यहाँ सिकंदर की विस्तृत जीवनी दी गई है:

1. प्रारंभिक जीवन और जन्म

​सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व में मैसेडोनिया (Macedonia) की राजधानी पेला में हुआ था। उनके पिता फिलिप द्वितीय मैसेडोनिया के राजा थे और उनकी माता का नाम ओलंपियास था।

​बचपन से ही सिकंदर को एक असाधारण बालक माना जाता था। उनकी शिक्षा-दीक्षा का भार महान दार्शनिक अरस्तू (Aristotle) को सौंपा गया था। अरस्तू ने उन्हें साहित्य, राजनीति, नैतिकता और विज्ञान की शिक्षा दी। यही कारण था कि सिकंदर न केवल एक योद्धा थे, बल्कि कला और दर्शन के भी प्रेमी थे।

2. राज्याभिषेक और सत्ता का संघर्ष

​336 ईसा पूर्व में जब सिकंदर के पिता फिलिप द्वितीय की हत्या कर दी गई, तब मात्र 20 वर्ष की आयु में सिकंदर को सिंहासन मिला। सत्ता संभालते ही उन्हें कई विद्रोहों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी सैन्य कुशलता से सभी को कुचल दिया और पूरे यूनान (Greece) पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।

3. विश्व विजय का सपना और फारस अभियान

​सिकंदर का सबसे बड़ा लक्ष्य फारस (Persia) के विशाल साम्राज्य को जीतना था, जो उस समय दुनिया का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था।

  • ग्रानिकस का युद्ध (334 ईसा पूर्व): यह फारसी सेना के खिलाफ उनकी पहली बड़ी जीत थी।
  • इसस का युद्ध (333 ईसा पूर्व): यहाँ सिकंदर का सामना फारसी राजा दारा तृतीय (Darius III) से हुआ। दारा की विशाल सेना होने के बावजूद सिकंदर की युद्ध नीति जीत गई।
  • गागामेला का युद्ध (331 ईसा पूर्व): यह निर्णायक युद्ध था जिसने फारसी साम्राज्य का अंत कर दिया और सिकंदर को "एशिया का राजा" बना दिया।

4. भारत पर आक्रमण और राजा पोरस से युद्ध

​अपनी विजय यात्रा को जारी रखते हुए सिकंदर 326 ईसा पूर्व में हिंदूकुश पर्वत पार कर भारत (सिंधु नदी के किनारे) पहुँचा। यहाँ उनका सामना पंजाब के राजा पोरस (Porus) से हुआ।

हाइडस्पेश का युद्ध (Battle of the Hydaspes)

​झेलम नदी के किनारे सिकंदर और पोरस के बीच भीषण युद्ध हुआ। पोरस की सेना में हाथियों का प्रयोग देखकर यूनानी सैनिक हैरान रह गए। हालाँकि सिकंदर की जीत हुई, लेकिन वह पोरस की बहादुरी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनका राज्य वापस कर दिया और उन्हें अपना मित्र बना लिया।

5. वापसी और मृत्यु

​भारत में व्यास नदी के तट पर पहुँचने के बाद सिकंदर की सेना ने आगे बढ़ने से मना कर दिया। सैनिक थक चुके थे और उन्हें मगध (नंद वंश) की विशाल सेना का डर था। भारी मन से सिकंदर को वापस लौटने का फैसला करना पड़ा।

​वापसी के दौरान, 323 ईसा पूर्व में बेबीलोन (Babylon) पहुँचते ही सिकंदर बीमार पड़ गए और मात्र 33 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के कारणों पर आज भी रहस्य बना हुआ है—कुछ इसे बीमारी (मलेरिया या टाइफाइड) मानते हैं, तो कुछ जहर दिए जाने की आशंका जताते हैं।



7. सिकंदर का प्रभाव और विरासत

​सिकंदर ने कई शहरों की स्थापना की, जिनमें से अधिकांश का नाम अलेक्जेंड्रिया रखा गया। मिस्र का अलेक्जेंड्रिया शहर आज भी शिक्षा और व्यापार का बड़ा केंद्र है। उनके अभियानों के कारण पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापारिक मार्ग खुले और संस्कृतियों का आदान-प्रदान हुआ।

​इतिहास में उन्हें "महान" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इतनी कम उम्र में और इतने कम संसाधनों के साथ उन्होंने दुनिया के एक बड़े हिस्से को एक झंडे के नीचे ला खड़ा किया था।


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