माता-पिता की सच्ची सेवा

 माता-पिता की सेवा संसार की सबसे बड़ी इबादत और पूजा मानी गई है। हमारे अस्तित्व की नींव से लेकर हमें एक सफल इंसान बनाने तक, उनका संघर्ष और प्रेम निस्वार्थ होता है।


माता-पिता की सच्ची सेवा: दुनिया का सबसे बड़ा धर्म

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी खुशियों और करियर के पीछे इतना भागते हैं कि उन लोगों को समय देना भूल जाते हैं जिन्होंने हमें चलना सिखाया। माता-पिता केवल हमारे जन्मदाता नहीं, बल्कि धरती पर ईश्वर का साक्षात रूप हैं।

सच्ची सेवा का अर्थ क्या है?

अक्सर लोग समझते हैं कि माता-पिता को केवल सुख-सुविधाएं और पैसे देना ही सेवा है। लेकिन सेवा का वास्तविक अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा है:

समय और सान्निध्य: उम्र के इस पड़ाव पर माता-पिता को आपके पैसों से ज्यादा आपके समय की जरूरत होती है। उनके पास बैठकर उनकी पुरानी बातें सुनना, उनके अनुभव जानना ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

सम्मान और शब्दावली: आप उनसे किस लहजे में बात करते हैं, यह बहुत मायने रखता है। आपके द्वारा बोले गए मधुर शब्द उनके बुढ़ापे की लाठी बन जाते हैं।

निर्णयों में भागीदारी: जब वे बूढ़े हो जाएं, तो उन्हें घर के फैसलों से अलग न करें। उनसे सलाह लें, ताकि उन्हें महसूस हो कि आज भी परिवार में उनकी अहमियत बरकरार है।

धैर्य (Patience): बढ़ती उम्र के साथ स्वभाव में चिड़चिड़ापन या याददाश्त में कमी आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में उन पर झुंझलाने के बजाय धैर्य के साथ उनका साथ देना ही सच्ची सेवा है।

सेवा क्यों आवश्यक है?

शास्त्रों में कहा गया है कि 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'—अर्थात् माँ और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है। पिता उस वटवृक्ष के समान है जो खुद धूप में तपकर अपनी संतानों को छांव देता है। उनकी सेवा करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि हमारे जीवन के संस्कार भी मजबूत होते हैं।

एक विचारणीय बात:

"याद रखें, आज आप अपने माता-पिता के साथ जैसा व्यवहार करेंगे, कल आपकी संतान आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेगी। माता-पिता की सेवा ही भविष्य के लिए लगाया गया सबसे बड़ा निवेश है।"

निष्कर्ष

माता-पिता की सेवा के लिए किसी विशेष मुहूर्त या धन की आवश्यकता नहीं है। बस आपके मन में उनके प्रति श्रद्धा और प्रेम होना चाहिए। उनके चेहरे की एक मुस्कान आपकी दुनिया संवारने की ताकत रखती है।

आज ही संकल्प लें कि दिन भर में कम से कम 15-20 मिनट उनके साथ बिना फोन के बैठेंगे और उनकी आंखों की चमक को महसूस करेंगे।

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